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बबूल: दांतों का प्राकृतिक डॉक्टर और आयुर्वेदिक वरदान

 बबूल: दांतों का प्राकृतिक डॉक्टर और आयुर्वेदिक वरदान

बबूल: दांतों का प्राकृतिक डॉक्टर और आयुर्वेदिक वरदान

देसी किकर(बबूल) इसकी पत्तियाँ बहुत छोटी होती है, इस पेड़ में काटे होते हैं। गर्मी के मौसम में इस पर पीले रंग के गोलाकार गुच्छे में फूल खिलते है। ठंड के मौसम में फलियां आती है, बबूल की छाल और गोंद का व्यापार किया जाता है। इसकी बहुत प्रजातियां हैं।इसका जो चिकित्सक।के लिए उपयोगी है उसकी कुछ प्रजातियां इस प्रकार है जैसे त्रिकंटकी,श्वेत खदीरी ये छोटा वृक्ष होता है, इसे कांटे होते हैं, इसकी चाल पतली तथा गहरे भूरे रंग की होती है।

बबूल के कई नाम होते हैं जैसे बबुर,बबूल,कीकर,गम अरेबिक ट्री,स्पितक,आभा,मालाफल,करूबेलगाम.

बबूल के कई लाभ है जैसे:-

  • दांतों के लिए तो बबूल किसी वरदान से कम नहीं।गेट दांतों में दर्द होने पर बबूल या कीकर का छिलका लें और उसमें बादाम के छिलके की राख मिला लें और नमक मिलाकर मंजन करें। दांतों के दर्द में राहत मिलेंगि.

  • वैसे तो बबूल के बहुत लाभ है। ये बहुत सी बीमारियों के इलाज में काम आता है जैसे भूख बढ़ाने, पेट, खांसी,दाद कमर दर्द, शारीरिक जलन, दांतों में दर्द, मुँह के छाले, आँखों के रोग, सांस की बिमारी, मासिक धर्म विकार और **** के ढीलेपन की समस्या के लिए तो ये वरदान है दांतों के रोगों में इसका उपयोग इस प्रकार। आयुर्वेदिक चिकित्सकों से परामर्श जरूर लें। 

  • बबूल की टहनियों से दातुन करने से भी दांत मजबूत होते हैं।

  • बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से दांतों का दर्द ठीक होता है।

  • दांतों के दर्द में बबूल की छाल, पत्ते, फूल और फलियां इन सभी को बराबर मात्रा में मिलाकर पाउडर बना लें। इससे मंजन करने से सभी प्रकार के दांतों को रोग ठीक होते है। बाकी रोग के लिए अगले अध्ययन में बात करेंगे। 

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