बबूल: एक चमत्कारी औषधि – आँखों, सांस और पेट की बीमारियों का आयुर्वेदिक इलाज
बबूल: एक चमत्कारी औषधि – आँखों, सांस और पेट की बीमारियों का आयुर्वेदिक इलाज
बबूल जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। पिछले पार्ट में बबूल की पहचान।उसकी प्रजाति और उसके बारे में जाना था। बबूल के बहुत से लाभ हैं।ये बहुत सी बिमारी के इलाज में काम आता है। पिछले पाठ में हमने बबूल को दांतों के रोग और उसके उपयोग के बारे में जानना दांतों के लिए तो ये किसी वरदान से कम नहीं है। शायद इसीलिए हर हर्बल दन्त पेस्ट और मंजन में बबूल का इस्तेमाल किया जाता है।आगे हमें बबूल के लाभ और उपयोग अन्य बिमारी में कैसे किया जाता है? जानेगे।
बबूल के लाभ:-
आँखों के रोग में बबूल के कोमल पत्तों को गाय के दूध में पीसकर रस निकाल लें। इसकी एक दो बूंद आँखों में डालें। इससे आँखों का दर्द ठीक होता है और सूजन में भी लाभ होता है।
आंखोमे पानी बहने पर बबूल के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे शहद के साथ मिलाकर आँखों में काजल की तरह लगाएं। आँखों से पानी आना बंद हो जाएगा।
बबूल के पत्ते और तने की छाल का काढ़ा बनाकर आँखों को धोएं। इससे आँखों की अन्य बीमारियां ठीक होती है।
सांस की बिमारी:- बबूल के पत्ते और तने की छाल का काढ़ा बनाकर इसे एक दो ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर सेवन करने से सांस की बिमारी में लाभ होता है।
इसी प्रकार बबूल के गोंद का सेवन करने से सांस की बिमारी ठीक होती है।
मुँह के छाले के लिए:- मुँह के छाले की परेशानी में बबूल से लाभ मिल सकता है। बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर इसे दो तीन बार गरारे करें। इससे मुँह के छाले ठीक होते हैं।
पेट के रोग:- बबूल की छाल का काढ़ा बनाकर रख दें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसे एक दो मिली की मात्रा मैं मीठे के साथ पिएं। इससे पेट की बिमारी से लाभ मिलता है।
बबूल की छाल का काढा को छाछ के साथ पिएं, इससे आहार के साथ सेवन करने से जलोदर रोग में लाभ मिलता है।
बबूल की फली का अचार इसमें सेंधा नमक मिलाकर खाने से भूख बढ़ती है और जठराग्नि में भी लाभ मिलता है।
एक बार आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें। और अन्य बीमारियों के लाभ और रुपये अगले पाठ में जानेगे।
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