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आयुर्वेद के अनुसार सही आहार: जानिए स्वस्थ रहने के सुनहरे नियम, विरुद्ध भोजन से होने वाले नुकसान और हित भुक मित भुक ऋत भुक का रहस्य

 आयुर्वेद के अनुसार सही आहार: जानिए स्वस्थ रहने के सुनहरे नियम, विरुद्ध भोजन से होने वाले नुकसान और हित भुक मित भुक ऋत भुक का रहस्य

भूमिका:-

आयुर्वेद सिखाता है कि "जो खाते हैं, वही बनते हैं" — इसलिए अगर जीवन में सेहत और ऊर्जा चाहिए तो भोजन का चुनाव सोच-समझकर करें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में सेहत के लिए सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि तीन सुनहरे नियम हैं? और क्या आप समझते हैं कि कौनसे खाद्य संयोजन आपके शरीर को धीरे-धीरे खोखला बना देते हैं? आइए जानें, कौनसे आहार हमारे लिए हितकर हैं, कौनसे हानिकारक, और आयुर्वेद क्या कहता है सदाबहार स्वास्थ्य रहस्य के बारे में — ऐसे नियम जो हजारों साल पहले लिखे गए थे, लेकिन आज भी सटीक हैं।

Ayurvedic Diet Ingredients - Healthy Indian Food for Wellness - Natural Healing Remedies



आज के समय में सवस्थ रहना मुश्किल होता जा रहा है। भोजन की शैली बदल चुकी है, जिसका असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। फूड आने के बाद तो जे से स्वास्थ्य के चक्कर में इस संतुलित भोजन खाना।भूल गए हैं, हर तरफ स्वाद देखते हैं। 

आ युर्वेद में कहा गया है, 'हित भुक, मित भुक, ऋत् भुक' यानी हितकर आहार लें। भूख से थोड़ा कम आहार लें। ऋतु के अनुसार आहार लें। इसके विपरीत भूख न लगने पर भी बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना या जंक फूड लेना रोगों २ को उत्पन्न करने वाला है।


रोजाना आहार में शामिल करें ये चीजें - रोजाना की डाइट में जौ, गेहूं, चावल, दाल में मूंगदाल, दूध एवं दूध से बने पदार्थों में गाय का दूध एवं घी, द्रव्य में तिल का तेल, शहद और जल, फलों में आंवला, मुनक्का, अनार, खजूर एवं हरड़, लवण में सेंधा नमक को शामिल करना चाहिए। भोजन दिनभर में 2-3 बार ही करें, बार-बार स्नैकिंग की आदत स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है।


विरुद्ध आहार न लें विरोधी


गुणों वाले भोज्य पदार्थ दूध के साथ मछली, फल, मूली, घी को अधिक गर्म करना, शहद के साथ गर्म पानी, भोजन-के बाद आइसक्रीम एवं कोल्डड्रिंक्स, रात में दही, चाय के साथ नमकीन, आलू परांठे के साथ दूध का सेवन रोगों 'का जोखिम बढ़ाता है। भोजन करते समय पेट आधा भाग ठोस से एवं 1/4 तरल से भरें और 1/4 भाग खाली रखें।


❓ FAQs :-

प्रश्न 1: आयुर्वेद के अनुसार 'हित भुक, मित भुक, ऋत भुक' का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका मतलब है — जो भोजन आपके लिए हितकर (लाभदायक) हो उसे खाएं, भूख से थोड़ा कम खाएं, और मौसम के अनुसार अपना आहार बदलें। ये तीन नियम स्वास्थ्य का आधार हैं।

प्रश्न 2: दिन में कितनी बार खाना चाहिए?

उत्तर: आयुर्वेद के अनुसार दिनभर में 2-3 बार भोजन पर्याप्त है। बार-बार स्नैकिंग करने की आदत पाचन शक्ति को कमजोर करती है और शरीर को रोग-ग्रस्त बनाती है।

प्रश्न 3: विरुद्ध आहार क्या होता है?

उत्तर: ऐसे खाद्य संयोजन जो एक-दूसरे के विपरीत गुण वाले हों, जैसे दूध और मछली, घी को अधिक गर्म करके रखना, शहद के साथ गर्म पानी, या रात में दही। ये संयोजन विषम (जहरीले) तत्वों को जन्म देते हैं और शरीर में अमा (विषाक्त पदार्थ) का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 4: रोजाना आहार में कौनसी चीजें जरूरी हैं?

उत्तर: गाय का दूध और घी, जौ और गेहूं, मूंगदाल, तिल का तेल, शहद, आंवला, मुनक्का, अनार, खजूर, हरड़ और सेंधा नमक। ये सभी तत्व प्राकृतिक रूप से शरीर को संतुलित रखते हैं।

प्रश्न 5: भोजन के समय पेट को कितना भरना चाहिए?

उत्तर: भोजन करते समय पेट को आधा भाग ठोस खाने से, 1/4 भाग तरल से भरें, और 1/4 भाग खाली रखें। यह नियम पाचन को सही रखता है और अपच नहीं होने देता।

प्रश्न 6: दूध के साथ क्या नहीं खाना चाहिए?

उत्तर: दूध के साथ मछली, फल, मूली, आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स नहीं खाने चाहिए। चाय के साथ नमकीन भी नुकसानदेह है। ये संयोजन शरीर में विकार (रोग) को जन्म देते हैं।


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